बाल ठाकरे ने सचिन को कहा था- आपने जो कमाया है उसे राजनीति की पिच पर मत गवाहों.

बाल ठाकरे के जाने के बाद, उनके पुत्र उद्धव ठाकुर ने 28 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. बाल ठाकरे भले ही इस दुनिया से जा चुकी हूं पर यह बात झूठ लाई नहीं जा सकती. कि वह अपने बेबाक हाजिर जवाबी के लिए मशहूर थे.

दरअसल यह किस्सा 2009 का है .जब सचिन से एक कांफ्रेंस के दौरान पूछा गया. कि क्या मुंबई सिर्फ मराठी ओं की है. इसका जवाब देते हुए सचिन ने कहा” मैं पहले एक इंडियन हूं. इसके बाद महाराष्ट्रीयन हूं. मुंबई सभी इंडियंस का है. तब बाल ठाकरे इस बयान से नाखुश थे. उन्हें सचिन का यह बयान बिल्कुल पसंद नहीं आया. तब बाल ठाकरे के गुस्से का शिकार सचिन तेंदुलकर को होना पड़ा.

बाल ठाकरे ने अपनी एक अखबार ‘सामना’ एक लेख में सीधे कहा, कि तू ने जो कमाया है, उसे राजनीति की पिच पर मत गवा.बाल ठाकरे ने सचिन के बयान का जवाब देते हुए कहा,” तुम अपने खेल के बादशाह हो जैसे खेलते हो, तुम्हें अंतरराष्ट्रीय नाम मिला है ,पैसा भी मिला है, तूने जो कमाया है उसे राजनीति की पिच पर मत गवाह.

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” ऐसा प्रेम पूर्ण संकेत तुझे तेरे भले के लिए दे रहा हूं. जब तुम खेलना शुरू करते हो तो लोग तुम्हारे चौके छक्के पर तालियां बजाते हैं. लेकिन मराठी ओके न्याय अधिकार के मुद्दे पर तुम अपना मुंह मत खोलो ,इससे मराठी ओं को ठेस पहुंचेगी. वे यह बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे.

उन्होंने आगे कहा” प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपने कहा मैं मराठी हूं और इस पर मुझे अभिमान है फिर भी मैं पहले हिंदुस्तानी हूं ऐसा कह कर आपने मराठी ओं का दिल दुखाया है” बाल ठाकरे इस पर भी शांति नहीं हुए. उन्होंने समन में लिखा कि तुम खेल की बजाय राजनीति के खेल पर बोल रहे हो. तुमने इतना तक कह दिया कि मुंबई किसी एक की नहीं है .हिंदुस्तान के सभी लोगों का मुंबई पर अधिकार है. सचिन यह शब्द मराठी मानुष को बहुत ही चुभ रहे है. बाल ठाकरे ने सचिन को यह भी बताया, कि मराठी ने मुंबई कैसे हासिल की है उन्होंने लिखा कि मराठी लोगों ने मुंबई को पाने के लिए बहुत संघर्ष किया हैं.

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आपके जन्म से पहले105 मराठी ओं ने अपनी जान गवा कर मुंबई हासिल की है. बाल ठाकरे के ऐसे जवाब पर सचिन ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी शायद शायद उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि मुंबई पर बयान देना उन पर इतना भारी पड़ेगा. इतना ही नहीं बाल ठाकरे की यह चेतावनी सच साबित भी हुई.

सचिन को साल 2012 में यूपीए के शासनकाल में राज्यसभा के लिए नियुक्त किया गया. सचिन में राज्यसभा की कुल कार्यवाही मैं सिर्फ 7.3 प्रतिशत ही भागीदारी निभाई. वे केवल 29 दिन ही सदन मैं हाजिरी दे पाए. हालांकि सचिन ने आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की एक-एक गांव को गोद लिया. और उसके लिए काफी कार्य किए.

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